मंगलवार, 4 मई 2010
""हिन्दी है हम वतन है ""
माना की आज हम सारे संसार पर छा रहे है ,हर जगह अपना परचम लहरा रहे है,लेकीन हमारी मात्र भाषा को अपनाने से क्यों कतरा रहे है ?माना की प्रगती के लीये अंग्रेजी जरुरी है लेकीन अपने ही देश में हमारी ही भाषा की ये दुर्गती क्यों है ??? हर देश की पहचान उसकी संस्कृती और भाषा से होती है अगर हम ही इसकी उपेक्षा करेंगे तो शायद आने वाला पल हमे भारतीय नहीं कुछ और ही कहेगा ये हमारा एक प्रयाश है हमारी भाषा को फीर से जीवंत करने का ये हमारा एक प्रयाश है हमारे वतन को फीर से भारत बनाने का मेरा सबसे अनुरोध है अपना कुछ कीमती वक़्त हमारी भाषा के नाम करे मुझे आप सबके सहयोग की जरुरत है आईये ताकी फीर से हम वो गीत गुनगुना सके हिन्दी है हम वतन है ........................... जय हिन्द जय भारत
गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010
!!.............."सचिन" देश की शान.................!!
..........हमें बेहद ख़ुशी है की एक बार पुनः हमारे के गौरव , क्रिकेट के सम्राट सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट के इतिहास में एक और स्वर्णिम रिकार्ड अपने नाम पर दर्ज कर दिया !! वाकई यह काबिलेतारीफ है , तथा हम सचिन की जितनी भी तारीफ करें वह कम है | हम अपनी ओर से उन्हें सादर बधाई देते है एवं उनकी उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं |
मै आज ख़ुशी के इस अद्भुत समय में देश के उन लाखों , करोड़ों युवाओं से अपील करना चाहता हूँ की वे आज इस ख़ुशी को व्यक्त करने के लिए करोड़ों अरबों की आतिशबाजी न करके , इन रुपयों का सदुपयोग करें तथा ऐसे बच्चे जिनकी जिन्दगी की खुशियों में ग्रहण लगा हुआ है , जो अपनी गरीबी से दाने दाने को मोहताज हैं, उन्हें आर्थिक मदद कर उन्हें भी सचिन तेंदुलकर , कलाम , जैसे महानायक बनने की प्रेरणा प्रदान करें |
आज इस अवसर पर देश की कई कम्पनियां , सरकार एवं धनि व्यक्ति अपनी ओर से उन्हें पुरस्कृत करने को बेताब है यह !! मगर इन सबसे ऊपर वास्तव में देश को इससे क्या लाभ होगा ? क्या हमारे देश की ज्वलंत समस्याएं दूर होंगी ? नहीं !! तो क्यों न हम इस बार अपनी ओर से ऐसा प्रयास करें जिससे हमारी ख़ुशी को चिर स्थायी अहसास में बदल दें तथा देश के नवनिर्माण में अपनी छोटी सी भूमिका का निर्वहन करें..........
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , शर्त ये है की ये सूरत भी बदलनी चाहिए !!!
मै आज ख़ुशी के इस अद्भुत समय में देश के उन लाखों , करोड़ों युवाओं से अपील करना चाहता हूँ की वे आज इस ख़ुशी को व्यक्त करने के लिए करोड़ों अरबों की आतिशबाजी न करके , इन रुपयों का सदुपयोग करें तथा ऐसे बच्चे जिनकी जिन्दगी की खुशियों में ग्रहण लगा हुआ है , जो अपनी गरीबी से दाने दाने को मोहताज हैं, उन्हें आर्थिक मदद कर उन्हें भी सचिन तेंदुलकर , कलाम , जैसे महानायक बनने की प्रेरणा प्रदान करें |
आज इस अवसर पर देश की कई कम्पनियां , सरकार एवं धनि व्यक्ति अपनी ओर से उन्हें पुरस्कृत करने को बेताब है यह !! मगर इन सबसे ऊपर वास्तव में देश को इससे क्या लाभ होगा ? क्या हमारे देश की ज्वलंत समस्याएं दूर होंगी ? नहीं !! तो क्यों न हम इस बार अपनी ओर से ऐसा प्रयास करें जिससे हमारी ख़ुशी को चिर स्थायी अहसास में बदल दें तथा देश के नवनिर्माण में अपनी छोटी सी भूमिका का निर्वहन करें..........
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , शर्त ये है की ये सूरत भी बदलनी चाहिए !!!
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