मंगलवार, 4 मई 2010

""हिन्दी है हम वतन है ""

माना की आज हम सारे संसार पर छा रहे है ,हर जगह अपना परचम लहरा रहे है,लेकीन हमारी मात्र भाषा को अपनाने से क्यों कतरा रहे है ?माना की प्रगती के लीये अंग्रेजी जरुरी है लेकीन अपने ही देश में हमारी ही भाषा की ये दुर्गती क्यों है ??? हर देश की पहचान उसकी संस्कृती और भाषा से होती है अगर हम ही इसकी उपेक्षा करेंगे तो शायद आने वाला पल हमे भारतीय नहीं कुछ और ही कहेगा ये हमारा एक प्रयाश है हमारी भाषा को फीर से जीवंत करने का ये हमारा एक प्रयाश है हमारे वतन को फीर से भारत बनाने का मेरा सबसे अनुरोध है अपना कुछ कीमती वक़्त हमारी भाषा के नाम करे मुझे आप सबके सहयोग की जरुरत है आईये ताकी फीर से हम वो गीत गुनगुना सके हिन्दी है हम वतन है ........................... जय हिन्द जय भारत

5 टिप्‍पणियां:

  1. बंधू ,
    आप तो कांग्रेसी हैं.इसका जबाब नेहरू-गांधी राजवंश में है .चिंतन कर देखिये. सपने तो ठीक हैं आपके पर इस स्वप्न के ' महा अभिशाप ' से जुड़े होकर आपका सपना ' पाखंड ' ही रह जायेगा . डा. लोहिया की शतवार्षिकी है .उनको पढ़िए तो इस सपने को सत्य भी कर सकते हैं.
    कटु टिप्पणी के बावजूद आप मुझे भी ' भारतीय ' ही माने .

    आपने स्वयं को भारतीय कहा इतना ही काफी है आपका सुस्वागतम !

    vande mataram !

    angrejee me taki aapke rahul baba bhee kah saken.

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. बहुत सही ..हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार हर हाल में किया जाना आवश्यक है....

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